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Date: 20-02-2017

चंद्रशेखरन मंगलवार को संभालेंगे टाटा समूह की बागडोर




मुंबई। देश के प्रमुख औद्योगिक घराने टाटा समूह की बागडोर मंगलवार से एन चंद्रशेखरन के हाथ में आ जाएगी। समूह के 150 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब कोई गैर-पारसी टाटा संस का चेयरमैन पद संभालेगा। इसके साथ ही समूह नए युग में प्रवेश करेगा। उम्मीद की जा रही है कि 54 वर्षीय चंद्रा इस औद्योगिक घराने के बोर्डरूम में हाल ही में मचे घमासान के साये से समूह को निकाल विकास की राह पर ले जाएंगे। यह बोर्डरूम की जंग टाटा संस के चेयरमैन पद से बर्खास्त होने के बाद साइरस मिस्त्री ने शुरू की थी। चंद्रा को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को शीर्ष पर पहुंचाने का श्रेय जाता है। चंद्रशेखरन अभी तक देश की दिग्गज आइटी कंपनी टीसीएस के एमडी व सीईओ थे। समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के निदेशक बोर्ड द्वारा बीते साल 24 अक्टूबर को साइरस की अचानक बर्खास्तगी के बाद चेयरमैन पद खाली हुआ था। अस्थायी व्यवस्था के तौर पर रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया था। इसके अलावा नए चेयरमैन की तलाश के लिए समिति गठित की गई थी। इस समिति ने ही 12 जनवरी को चंद्रशेखरन को टाटा टाटा संस का नया चेयरमैन नियुक्त करने का एलान किया था। वह चंद्रा के नाम से भी मशहूर हैं। चंद्रा ने बीते हफ्ते ही नई जिम्मेदारी को बहुत बड़ा काम बताया था। उन्होंने कहा था कि इसके साथ तमाम चुनौतियां व अवसर जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही चंद्रा ने उम्मीद जताई कि नए पद पर वे कुछ अलग कर पाएंगे। बड़ी चुनौतियों से पाना होगा पार इस पद पर चंद्रशेखरन के समक्ष पहली सबसे बड़ी चुनौती समूह की कंपनी टाटा स्टील के यूरोपीय कारोबार को लेकर है। उन्हें इस घाटे वाले कारोबार के लिए कोई स्थायी समाधान ढूंढना होगा। इसके अलावा दूसरी बड़ी चुनौती रतन टाटा के ड्रीम प्रोजेक्ट नैनो को दुरुस्त करने की होगी। अब तक इस लखटकिया कार परियोजना पर टाटा मोटर्स को 1,000 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है।


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