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Date: 20-02-2017

डिजिटल हथियारों से लड़ी जा रही है चुनावी लड़ाई




उत्तर प्रदेश में तीन चरणों का चुनाव खत्म हो चुका है। सभी पार्टियां आखिरी चार चरणों की सीट पर प्रचार में जुटी है। तमाम पार्टियों के बड़े नेता चुनावी सभाएं कर विपक्ष के हमलों का जवाब दे रहे हैं। वहीं, उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं। पर इस सबके बीच, परदे के पीछे रहकर भी चुनाव लड़ा जाता है। चुनाव क्षेत्रों में धूल और शोर-शराबे के बीच प्रचार का सियासी तापमान भी इन एसी रूम से नापा जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा में वॉर रूम का चलन पुराना है। लोकसभा और विभिन्न प्रदेशों की विधानसभाओं में चुनाव प्रचार का संचालन दोनों पार्टियों वॉर रूम से करती रही है। पर सोशल मीडिया से बढ़ते प्रभाव ने वॉर रूम की अहमियत बढ़ा दी है। बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू यादव के गठबंधन ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात लोगों तक पहुंचाई। बाद में दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने भी इसे अपनाया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वॉर रूम की अहमयित का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस-भाजपा के साथ समाजवादी पार्टी भी प्रोफेशनल्स के जरिए प्रचार कर रही है। ‘काम बोलता है’ या ‘यूपी को यह साथ पसंद है’ दोनों नारे वॉर रुम से जरिए ही लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं। बसपा ने प्रोफेशनल्स की मदद नहीं ली है, पर पार्टी के कुछ कार्यकर्ता ही प्रचार से जुड़े है। चुनावी रणनीति वार रूम में ही तय होती है। कैसे काम करते हैं वॉर रूम चुनाव के वक्त वॉर रुम में चौबीस घंटे सातों दिन काम होता है। रूम में लगी टीवी स्क्रीन पर अलग-अलग चैनल चलते रहते हैं। कंप्यूटर स्क्रीन पर व्हाट्सएप्प, ट्विटर, फेसबुक सहित सोशल मीडिया के सभी माध्यमों पर नजर रखी जाती है। विपक्षी पार्टियों के नेताओं की सभाओं पर खास ध्यान रहता है। दूसरी पार्टी को कोई बड़ा नेता कोई आरोप लगाता है, तो रूम में बैठे रणनीतिकार फौरन उसके जवाब की तैयारी में जुट जाते हैं। चंद मिनट में आरोप का जवाब तैयार कर मोबाइल के जरिए अपनी पार्टियों के नेता तक पहुंचा दिया जाता है। अगली सभा में आरोपों का जवाब दे दिया जाता है। सोशल मीडिया वॉर रूम में सोशल मीडिया से जुड़े कार्यकर्ता विरोधी पार्टियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। जैसे ही कोई मैसेज नजर में आता है, फौरन उसका जवाब पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं को भेज देते हैं। यह कार्यकर्ता फौरन अपने-अपने क्षेत्रों के व्हाट्सएप्प ग्रुप में यह मैसेज शेयर करते हैं। कुछ देर के अंदर ही यह मैसेज हजारों लोगों तक पहुंच जाता है। इसके साथ ट्विटर-फेसबुक पर भी नारे और वादों का प्रचार-प्रसार किया जाता है। विरोधियों की रणनीति का जायजा वॉर रूम में हर वक्त तैनात रणनीतिकार हर क्षेत्र में विरोधी पार्टी की रणनीति का आंकलन करते रहे हैं। इसकी प्रतिदिन एक रिपोर्ट तैयार कर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेजी जाती है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि कई बार उम्मीदवार वॉर रुम में फोन कर प्रचार से संबंधित मदद मांगते हैं। रणनीतिकार फौरन उन्हें मदद मुहैया कराते हैं। कौन नेता किस क्षेत्र में कब प्रचार करेगा, इसका खाका भी वॉर रुम में ही तैयार होता है।


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