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Date: 15-11-2016

नोटबंदी मुद्दे पर संसद में सरकार-विपक्ष के बीच टकराव तय




नोटबंदी के मुद्दे पर संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार व विपक्ष में पहले ही दिन से टकराव तय हो गया है। विपक्ष के दोनों सदनों में काम रोको प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है तो सत्तापक्ष भी विपक्षी दलों के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के भ्रष्टाचार के मामले उछालने के लिए तैयार है। सरकार को सबसे बड़ा झटका सहयोगी दल शिवसेना ने दिया है, जिसने नोटबंदी के मुद्दे पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के साथ राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। केंद्र सरकार भले ही विपक्ष के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखा रही हो, लेकिन नोटबंदी से मंगलवार को भी देश भर में बैंकों व एटीएम में लगी लंबी कतारों से सरकार के प्रबंधकों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। जनता की दिक्कतों का बड़ा मुद्दा हाथ लगने से विपक्ष पूरी तरह एकजुट न हो पाने के बावजूद सरकार के प्रति किसी तरह का नरम रुख दिखाने को तैयार है। हालांकि सत्र के पहले दिन लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की सांसद रेणुका सिन्हा के निधन के कारण सदन उनको श्रद्धांजलि के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित हो जाएगा। इसके बाद लोकसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक होगी, जिसमें सरकार अपनी तरफ से विपक्ष के सामने नोटबंदी पर बहस की पेशकश करेगी। राज्यसभा में सरकार को होगी दिक्कत लोकसभा में बहुमत के कारण सरकार को किसी भी नियम पर बहस की दिक्कत नहीं है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि वह काम रोको प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेगी। सरकार की सबसे बड़ी दिक्कत राज्यसभा है, जहां विपक्ष का बहुमत होने से उसके अनुसार सदन नहीं चल सकता है। शिवसेना के तेवरों से सरकार सकते में सरकार को सबसे बड़ा झटका सहयोगी दल शिवसेना से लगा है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने जनता की दक्कितों को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस के साथ राष्ट्रपति भवन जाने का फैसला किया है। एक दिन पहले एनडीए की बैठक में शिवसेना ने सरकार के नोटबंदी के फैसले का पूरा समर्थन किया था। सूत्रों के अनुसार शिवसेना हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राकांपा नेता शरद पवार के साथ एक मंच पर साथ आने से नाराज है। वैसे भी दोनों दलों में रश्तिे नरम गरम रहे हैं। अगले साल होने वाले बीएमसी चुनावों को लेकर भी दोनों दलों में तकरार है। सत्र में अहम विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में जीएसटी से जुड़े तीन अहम विधेयक पारित किए जाने की संभावना है। इनमें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विधेयक एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर विधेयक राज्य वस्तु एवं सेवा कर विधेयक इसके अलावा सरकार इन विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करेगी किराये की कोख (नियमन) विधेयक भारतीय प्रबंध संस्थान विधेयक उपभोक्ता संरक्षण विधेयक नौ सेना अधिकरण विधेयक


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